… परिंदे को बताओ प्यास का अहसास घातक है: राज लॉयर

… परिंदे को बताओ प्यास का अहसास घातक है: राज लॉयर

नूतन वर्ष की पावन वेला में साहित्यिक रूचि के पाठकों के लिए हम लाये हैं भूराज सिंह “राज लॉयर” के मुक्तक। सभी मुक्तक नये हैं, जिससे और ज्यादा अच्छे लगेंगे। कहा जाता है कि भूराज सिंह “राज लॉयर” के स्तर के मुक्तक हाल-फिलहाल हिंदी जगत में कोई नहीं लिख पा रहा है, इसीलिए वे मंच […]

एक लड़की गाँव में हंसती बहुत थी बेवजह: गरल

एक लड़की गाँव में हंसती बहुत थी बेवजह: गरल

सुप्रसिद्ध कवि नरेंद्र गरल की सर्वाधिक चर्चित रचनाओं में से एक रचना है कि “छोड़ आये गाँव फसलों की फिजायें छोड़ आये”। भारत का बड़ा वर्ग गांवों में रहता है। रोजी, रोटी के साथ अन्य तमाम कारणों से व्यक्ति को गाँव छोड़ना पड़ जाता है पर, तमाम झंझावतों के बीच व्यक्ति के अंदर गाँव हमेशा […]

भूख ईमान से बढ़ कर है तो ठहर जाओ, रोटियां घास की खाओ तो मेरे साथ चलो

भूख ईमान से बढ़ कर है तो ठहर जाओ, रोटियां घास की खाओ तो मेरे साथ चलो

बदायूं जिला गंगा और रामगंगा के बीच में बसा है, इसीलिए यहाँ की भूमि बेहद उपजाऊ है, यहाँ का कण-कण बेशकीमती है। समानुकूल वातावरण मिलने के कारण ही साहित्य की फसल यहाँ हमेशा लहलहाती रहती है। कुछ अंकुर यहाँ की जमीन में ही फूटते हैं तो, कुछ पौधे यहाँ आकर वट वृक्ष बन जाते हैं। […]

चिता मंजिल नहीं है जिंदगी की, यहाँ से रास्ता मोड़ा गया है: नरेंद्र गरल

चिता मंजिल नहीं है जिंदगी की, यहाँ से रास्ता मोड़ा गया है: नरेंद्र गरल

सुविख्यात कवि, गीतकार और गजलकार नरेंद्र गरल आध्यात्मिक रूचि के व्यक्ति हैं, सो उनकी रचनायें महानतम श्रेणी में रखी जा सकती हैं। पौराणिक घटनाओं का अपने अंदाज में उल्लेख कर श्रोताओं के अंदर तक घुस जाते हैं। नरेंद्र गरल की एक गजल ऐसी है, जिसे सुनने वाले वाह-वाह करना ही भूल जाते हैं। पढ़ें: मेरी […]

मेरी बाँहों में झूलते थे जो, वे भी अब तमतमाये बैठे हैं: नरेंद्र गरल

मेरी बाँहों में झूलते थे जो, वे भी अब तमतमाये बैठे हैं: नरेंद्र गरल

नरेंद्र गरल स्वयं में साहित्य का चलता-फिरता ग्रंथ हैं। साहित्य की हर विधा में पारंगत हैं, साथ ही लिखते हुए और मंच पर काव्य पाठ करते हुए उन्हें लंबा समय हो गया है। अनुभव के चलते उनकी रचनायें और गूढ़ हो गई हैं, सरल भी हो गई हैं, जिससे उन्हें सुनते हुए श्रोता अब वाह-वाह […]

तुम अंक से बिछुड़ कर अब शून्य हो गये हो… नरेंद्र गरल

तुम अंक से बिछुड़ कर अब शून्य हो गये हो… नरेंद्र गरल

प्रसिद्ध कवि, गीतकार और गजलकार नरेंद्र गरल की उन्हीं की जुबानी एक और रचना पेश है। करुणा और अध्यात्म के सटीक तालमेल के चलते रचना अद्भुत हो गई है। प्रसिद्ध रचनाकार नरेंद्र गरल ने सरलता से बड़ी बात कह दी है। बड़ी बात को आसानी कह देना ही नरेंद्र गरल की बड़ी खूबी है। पढ़ें: […]

… एक चितवन से पराजित हो गई है जिंदगी: नरेन्द्र गरल

… एक चितवन से पराजित हो गई है जिंदगी: नरेन्द्र गरल

प्रसिद्ध कवि नरेंद्र गरल की एक प्रसिद्द गजल है, जिसे सुनो तो, सुनते ही रहने का मन करता है। गजल का एक-एक शब्द अंदर तक तरल पदार्थ की तरह घुलता सा महसूस होता है। बड़ी बात इतनी सहजता से कही गई है कि सबके मन को छूते हुए दिल में उतर जाती है। गरल जी […]

नदी उमड़ी हुई है गाँव वालो, बचाना हो तो, अपना घर बचा लो …

नदी उमड़ी हुई है गाँव वालो, बचाना हो तो, अपना घर बचा लो …

साहित्य के संसार में एक ऐसा वृक्ष है, जिसने ग्लैमर पसंद न होने के कारण स्वयं को बस्ती और जंगल से भी दूर ऐसे एकांत में समेट लिया है, जहाँ सिर्फ वही है। साहित्य के संसार में उड़ते हर पक्षी को वृक्ष के बारे में पता है, हर पक्षी उसकी साखों पर बैठना चाहता है, […]

उसके अब हैं दोस्त बहुत, कारण, उसकी शोहरत है: सोनरूपा

उसके अब हैं दोस्त बहुत, कारण, उसकी शोहरत है: सोनरूपा

बदायूं का कोई न कोई साहित्यकार साहित्य के विशाल आसमान में ध्रुव तारे की तरह चमकता ही रहता है। साहित्यिक दृष्टि से बदायूं की भूमि बेहद उपजाऊ मानी जाती है, यहाँ बिखरे बीज समानुकूल ऋतू आते ही अंकुरित हो उठते हैं। बीज में सबसे अच्छी बात यही होती है कि चाहे जितने गहरे में दबा […]

अपने जीवन में झांक लो कि कितनी औरतों को तबाह किया: गीता

अपने जीवन में झांक लो कि कितनी औरतों को तबाह किया: गीता

दैनिक जागरण ने हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘हिंदी हैं हम’ के अंतर्गत 21 व 22 अप्रैल को दो दिवसीय कार्यक्रम “बिहार संवादी” का आयोजन किया। कठुआ कांड की खबर को लेकर दैनिक जागरण के आयोजन का कवियों, लेखकों, रंगमंच के कलाकारों और पत्रकारों ने बहिष्कार कर दिया, साथ ही तमाम लोगों ने […]

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