सजा प्रकृति ऋतुराज ने, किया सुहाना काज, रतिपति ने भी रच दिया, काम भाव का साज

सजा प्रकृति ऋतुराज ने, किया सुहाना काज, रतिपति ने भी रच दिया, काम भाव का साज

बदायूं की साहित्यिक संस्था शब्दिता द्वारा प्रोफेसर कॉलोनी में वसंत के चलते काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में तमाम कवियत्रियों ने ऐसे-ऐसे रंग भरे कि सभी का मन मोर की तरह नाचने लगा और हर किसी के मुंह से वाह-वाह निकलता रहा।

सरिता चौहान ने कहा…
वासंती अभिनन्दन करने हुआ सूर्य आदेश
बदलने लगी धरा गणवेश

डॉ. निशि अवस्थी ने कहा…
जर्रे-जर्रे से तेरा एहसास आ गया
देख सखि देख फिर वसंत आ गया

डॉ. गायत्री प्रियदर्शनी ने कहा…
फरवरी है या धूप ने कोई गजल गुनगुनाई है

मधु अग्रवाल ने कहा…
पाया संत किया सत्संग
हुआ दुखों का अंत
इसी को कहते हैं वसंत

डॉ. कमला माहेश्वरी ने कहा…
सजा प्रकृति ऋतुराज ने, किया सुहाना काज
रतिपति ने भी रच दिया, काम भाव का साज

डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने कहा…
अब वसंत का मौसम मन में नई उमंगें लाता है
कोयल की मीठी बोली मे कुछ ऐसा भाव समाता है

चंचल मिनोचा ने कहा…
हर वसंत जब आता है, तब पतझड़ चला ही जाता है
बस यूं ही जानो जीवन में, सुख आता, दुःख चला जाता है

डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा…
मेरे देश का हाल ना पूछो वसंत
मनवा तुम्हारा दहल जाएगा
जो सुनाई व्यथा हमने देश की
हाल तुम्हारा फिर बिगड़ जाएगा

इसके अतिरिक्त रमा भट्टाचार्य, ममता नौगरिया, मधु राकेश, रीना सिंह, शिल्पी रस्तोगी, उषा किरण रस्तोगी ने भी काव्यपाठ किया, इस अवसर पर मंजुल शँखधार, कुसुम रस्तोगी, मधु शर्मा, पूनम रस्तोगी, रीता अग्रवाल, डॉ. सरला चक्रवर्ती, सुषमा भट्टाचार्य और उमा सिंह गौर उपस्थित रहीं। अंत में कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. सोनरूपा विशाल ने सुंदर साहित्यिक शाम सजाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन शुभ्रा माहेश्वरी ने किया।

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