सीएमओ कार्यालय के भ्रष्ट ओपी सिंह से त्रस्त हैं जिले भर के कर्मचारी

सीएमओ कार्यालय के भ्रष्ट ओपी सिंह से त्रस्त हैं जिले भर के कर्मचारी

बदायूं के स्वास्थ्य विभाग में ऐसे-ऐसे लोग नियुक्ति पा गये हैं, जो अपने माँ-बाप, पत्नी और बच्चों को भी रिश्वत लिए बिना नहीं छोड़ेंगे, ऐसा अनुमान इसलिए लगाया जा रहा है कि कर्मचारी महीनों और वर्षों से भटक रहे हैं लेकिन, बाबू रिश्वत न मिलने के कारण साथी कर्मचारियों की बात तक सुनने को तैयार नहीं है। भ्रष्ट बाबू के विरुद्ध पीड़ित कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं।

सीएमओ के कार्यालय में तैनात बाबू ओपी सिंह के बारे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का ही कहना है कि इतना भ्रष्ट व्यक्ति उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखा है। पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि एरियल, बोनस, बिल वगैरह की संस्तुति ओपी सिंह कराता है। आरोप है कि ओपी सिंह रिश्वत लिए बिना किसी कर्मचारी के रूपये नहीं निकलने देता। एक पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि उसने थकहार कर रिश्वत दे दी, पत्रावली पर सीएमओ ने संस्तुति प्रदान कर दी है पर, अब ओपी सिंह ट्रेजरी में पत्र भेजने के और रूपये मांग रहा है।

बाबू हर प्रसाद का कहना है कि उन्होंने रूपये दे दिए, फिर उनकी पत्रावली लटकी हुई है। भ्रष्ट ओपी सिंह की कार्यप्रणाली से जिले भर के कर्मचारी त्रस्त बताये जा रहे हैं। फार्मासिस्ट भी बोनस और एरियल वगैरह न मिलने से त्रस्त हैं, जिससे त्रस्त कर्मचारी अब लामबंद होने लगे हैं। सीएमओ ने भ्रष्ट ओपी सिंह पर शीघ्र ही अंकुश नहीं लगाया तो, त्रस्त कर्मचारी कभी भी आंदोलन कर सकते हैं।

उक्त प्रकरण में देखा जाये तो, सीएमओ भी दोषी नजर आ रहे हैं, क्योंकि संबंधित बाबू का यह दायित्व है कि वह कर्मचारियों का धन उनके खाते में निर्धारित समय के अंदर स्वतः भेजता रहे, जिसकी समीक्षा सीएमओ को करना चाहिए। अगर, बाबू अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो, उनके विरुद्ध कार्रवाई होना चाहिए। भ्रष्ट बाबू के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए शिकायत का इंतजार करना भी दोष ही कहा जायेगा।

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