आबिद रजा का विरोध, रणनीति या, सुरेश पाल सिंह चौहान के आड़े आई जाति

आबिद रजा का विरोध, रणनीति या, सुरेश पाल सिंह चौहान के आड़े आई जाति

बदायूं जनपद में समाजवादी पार्टी का उदयवीर सिंह शाक्य को महासचिव, सुनील यादव को जिला उपाध्यक्ष और रचित गुप्ता को जिला कोषाध्यक्ष घोषित कर दिया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल द्वारा पत्र जारी करते ही वरिष्ठ सपा नेता सुरेश पाल सिंह चौहान को लेकर जनपद में तरह-तरह की चर्चायें होने लगीं। कयासबाजी का दौर लगातार जारी है।

लखनऊ में 15 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बदायूं जनपद के नेताओं के साथ बैठक की थी, इस बैठक में जिले के कद्दावर नेता एवं पूर्व मंत्री आबिद रजा ने सुरेश पाल सिंह चौहान का खुल कर विरोध किया था, इस विरोध को लेकर चर्चा है कि अखिलेश यादव के सामने पोल खुलने के कारण ही सुरेश पाल सिंह चौहान को महासचिव नहीं बनाया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ठाकुरों को जोड़ कर देखा जाता है। माना जाता है कि हाल-फिलहाल ठाकुर भाजपा के साथ ही रहेंगे, ऐसे में ठाकुरों को पद देने से किसी का कोई बड़ा राजनैतिक लाभ नहीं होने वाला, साथ ही अखिलेश यादव भी समय-समय पर ठाकुरों को लेकर बयान देते रहते हैं, इसीलिए कहा जा रहा है कि सुरेश पाल सिंह चौहान को ठाकुर होने के कारण किनारे कर दिया गया।

चर्चा यह भी है कि जिलाध्यक्ष आशीष यादव से नया नाम देने को कहा गया था पर, आशीष यादव ने नेतृत्व को अवगत करा दिया कि महासचिव किसी अन्य को बनाना है तो, घोषणा प्रदेश कार्यालय से ही की जाये, वे सुरेश पाल सिंह चौहान के अलावा किसी अन्य की घोषणा नहीं करेंगे। हालांकि आशीष यादव के विरोधियों का कहना है कि नेतृत्व ने उन्हें बताये बिना ही घोषणा की है, जिससे उनका भी कद घट गया है।

उधर चर्चा यह भी है कि रणनीति के तहत सुरेश पाल सिंह चौहान की जगह उदयवीर सिंह शाक्य को महासचिव बनाया गया है। विधान सभा चुनाव में उदयवीर सिंह शाक्य 25% मौर्य भी तोड़ने में सफल हो गये तो, परिणाम बदल सकते हैं। खैर, हजार मुंह और हजार तरह की बातें, किसे सच माना जाये और किसे झूठ। राजनीति में हर कोई अपना कद बढ़ाने की ही बातें करता है। कारण जो भी हो पर, हाल-फिलहाल सच यह है कि अब सुरेश पाल सिंह चौहान महासचिव नहीं हैं।

यह भी बता दें कि सुरेश पाल सिंह चौहान दिवंगत बनवारी सिंह यादव के दाहिना हाथ कहे जाते थे। सुरेश पाल सिंह चौहान को नेतृत्व ने हटा दिया तो, बनवारी सिंह यादव ने महासचिव नियुक्त ही नहीं किया था, उन्होंने बिना महासचिव के ही काम चलाया, उनके बाद आशीष यादव ने भी सुरेश पाल सिंह चौहान को सर्वोच्च स्थान पर रखा पर, वे भी महासचिव पर सुरेश पाल सिंह चौहान को नियुक्त कराने में असफल साबित हुए हैं। जो भी सही, उनके संबंध किसी पद से प्रभावित नहीं हो सकते। आशीष यादव सुझाव और सहयोग सुरेश पाल सिंह चौहान से लेते रहेंगे।

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