बदायूं जनपद में तबादला घोटाला करने वाले डीएम अवनीश राय और एडीएम (प्रशासन) अरुण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना चाहिए था लेकिन, अभी तक जनपद से हटाया तक नहीं गया है। डीएम अवनीश राय और एडीएम (प्रशासन) अरुण कुमार की हठधर्मिता जनपद भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार और मनमानी रोकने के उद्देश्य से शासन ने स्थानांतरण नीति बनाई है, जिसके अंतर्गत समूह- ग के कर्मचारी किसी एक पटल पर लगातार तीन वर्ष से अधिक समय तक नहीं रह सकते लेकिन, बदायूं जनपद में कोई बाबू एक ही पटल पर आठ वर्षों से तैनात है और कोई बाबू सात वर्षों से, ऐसे भी बाबू हैं, जिनकी मूल तैनाती अन्य विभागों में या, तहसील मुख्यालयों पर है पर, वर्षों से किसी अन्य विभाग या, जनपद मुख्यालय पर संबद्ध हैं। शासन की नीति के क्रम में बदायूं के डीएम अवनीश राय ने बाबुओं के तबादले कर दिये हैं। 21 जुलाई को एडीएम (प्रशासन) अरुण कुमार के हस्ताक्षर से तबादला सूची जारी की गई। सूची सार्वजनिक हुई तो, ज्ञात हुआ कि यह तबादले नहीं किये गये हैं बल्कि, तबादला घोटाला हुआ है।
तबादला सूची से स्पष्ट है कि 8-9 वर्षों से मलाईदार पटल संभाल रहे बाबू हटाए नहीं बल्कि, सिर्फ हिलाये हैं। उदाहरण के लिए 16 नंबर पर प्रेम जौहरी का नाम देखिये। अभी तक प्रेम जौहरी टीएसी प्रथम थे और कु. वंदना टीएसी द्वितीय थीं, अब प्रेम जौहरी को टीएसी द्वितीय और कु. वंदना को टीएसी प्रथम पद पर स्थानांतरित किया गया है, इसी तरह अन्य बाबुओं के स्थानांतरण किये गये हैं। दाईं कुर्सी से उठा कर बाईं कुर्सी पर और बाईं कुर्सी से उठा कर दाईं कुर्सी पर तबादला किया गया है, साथ ही संबद्ध बाबुओं को मूल तैनाती स्थल पर भी नहीं भेजा गया है, इसके अलावा वरिष्ठता क्रम का भी ध्यान नहीं रखा गया है। कनिष्ठ बाबू वरिष्ठ बाबुओं के सिर पर ही बैठे हैं, वे वरिष्ठों को आदेश-निर्देश देते रहेंगे। कई बार कर्मचारियों का सपना होता है कि सेवानिवृत्त के समय उच्च दायित्व संभाल रहे हों ताकि, अनुभूति में रहे कि बड़े दायित्व पर भी रहे हैं, लेकिन, ऐसे कई वरिष्ठ बाबू हैं, जिन्हें सिर्फ वेतनमान ही मिल रहा है पर, ग्रेड के अनुसार दायित्व आज तक नहीं मिला है।
तबादला सूची में गंभीर खामियां हैं, जिनको लेकर तमाम तरह की चर्चायें की जा रही हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह तबादला घोटाला हुआ है। घोटाला सार्वजनिक भी हो गया है लेकिन, डीएम अवनीश राय और एड़ीएम (प्रशासन) अरुण कुमार के निलंबन की तो बात ही छोड़िये, इन दोनों अफसरों को अभी तक जनपद से हटाया तक नहीं गया है, जबकि तबादला सूची से संपूर्ण कार्यप्रणाली भी समझी जा सकती है।
इसके अलावा आईएएस अफसरों के लिये शासन स्तर से कोई ड्रेस अनिवार्य नहीं है पर, रूल बुक में नैतिकता, व्यवहार और पहनावा आदि का उल्लेख आता है। 2022 में पटना उच्च न्यायालय के जज न्यायमूर्ति पी. बी. बाजनथ्री ने आईएएस अधिकारी आनंद किशोर को पहनावे को लेकर फटकारा था। न्यायमूर्ति ने पी. बी. बाजनथ्री से पूछा था कि क्या आपको लगता है कि यह एक सिनेमा हॉल है? सुनवाई के दौरान कोट नहीं पहना था और कॉलर का बटन खुला हुआ था, इस पर न्यायमूर्ति नाराज हो गये थे, इस क्रम में डीएम अवनीश राय के पहनावे की बात करें तो, वे काला चश्मा, टी-शर्ट और सैंडिल पहन कर थाना दिवस तक में पहुंच जाते हैं, सरकारी दौरे करते हैं, इससे स्पष्ट होता है कि वे दायित्व को लेकर गंभीर नहीं है, वे डीएम के दायित्व की शक्तियों का कई एकड़ में फैले बंगले के अंदर सिर्फ आनंद ले रहे हैं, इसी सोच के चलते बड़ा तबादला घोटाला हो गया।
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