पीड़ितों का ही उत्पीड़न करने वाले एसओ के विरुद्ध नहीं हुई दंडात्मक कार्रवाई

पीड़ितों का ही उत्पीड़न करने वाले एसओ के विरुद्ध नहीं हुई दंडात्मक कार्रवाई
थाना वजीरगंज की हवालात में बंद पीड़ित ड्राईवर अशोक।

बदायूं जिले के थाना वजीरगंज में तैनात एसओ राजेश कश्यप ने हाईवे पर लुटे-पिटे लोगों की मदद नहीं की, साथ ही पीड़ितों को ही उल्टा प्रताड़ित किया। दो लोगों को अपनी हनक में हवालात में बंद कर दिया और फिर उनकी बेरहमी से मार भी लगाई। भाजपाईयों के लामबंद होने पर पीड़ितों को एसओ ने बड़ी मुश्किल से रिहा किया, लेकिन एसओ के विरुद्ध दस घंटे बाद भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि वजीरगंज थाना क्षेत्र के गाँव हतरा से शुक्रवार को सोहिल की बारात इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गाँव नसरौल गई थी। बारात में बड़ी संख्या में महिलायें भी गई थीं। निकाह और दावत के बाद कुछ बाराती दो छोटी गाड़ियों में लौट रहे थे, तभी बीती रात करीब 12 बजे हाईवे पर मंगला कोल्ड स्टोर से पहले टूटे रोड से जैसे ही गाड़ियाँ कच्चे रास्ते पर उतरीं, तभी चारों ओर से बदमाशों ने दोनों गाड़ियों को घेर लिया। बदमाशों ने शीशा तोड़ कर ड्राईवरों की कनपटी पर तमंचे सटा दिए, जिससे उन्हें गाड़ियाँ रोकनी पड़ीं। गाड़ियाँ रुकते ही दर्जन भर बदमाशों ने गाड़ियों में सवार एक-एक महिला के गहने उतरवा लिए, सभी के पर्स लूट लिए, एक मोबाइल पर लूट लिया और जमकर मारपीट भी की। 7-8 लाख के गहने और नकदी लूट कर बदमाश आसानी से फरार हो गये।

घटना के समय हाईवे पर दूर तक पुलिस नहीं थी। घटना के बाद पीड़ितों ने पुलिस को सूचना दी, तो पुलिस एक घंटे तक नहीं पहुंची, लेकिन जब पुलिस आई, तो दोनों गाड़ियाँ और उनके ड्राईवरों को थाने ले गई, जिन्हें हवालात में बंद कर दिया और फिर बारी-बारी से हवालात से निकाल कर ड्राईवरों की बेरहमी से मार भी लगाई। एक गाड़ी वजीरगंज से किराये पर गई थी, जिस पर अशोक नाम का व्यक्ति ड्राईवर था एवं दूसरी गाड़ी दूल्हे के बहनोई अजहर की थी, जिसे वे स्वयं चला रहे थे। सूत्रों का कहना है कि अजहर को एक विधायक की सिफारिश पर रात में ही रिहा कर दिया गया, लेकिन अशोक को सुबह तक भी नहीं छोड़ा। स्थानीय गाड़ी भाजपा समर्थक की थी, जिसके पक्ष में भाजपाई थाने गये और उन्होंने सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता का हवाला दिया, तो एसओ ने विधायक के संबंध में भी हल्के शब्दों का प्रयोग किया, जिसके बाद भाजपाई लामबंद हो गये, तो एसओ ने अशोक को भी रिहा कर दिया। इस घटना से पुलिस की बड़ी फजीहत हो रही है, लेकिन दस घंटे बाद भी एसओ राजेश कश्यप के विरुद्ध दंडात्मक कार्रर्वाई नहीं की गई है।

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