खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले फहीम पर नहीं हुई कार्रवाई

खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले फहीम पर नहीं हुई कार्रवाई
  • बढ़ती ही जा रही है फहीम की मनमानी
  • लक्ष्य बना कर महिलाओं का कर रहा शोषण
  • सपा के एक विधायक को भी लगा रहा है कलंक 
समकक्ष बाबू को अफसर की तरह निर्देश देते हुए फहीम का फ़ाइल फोटो
समकक्ष बाबू को अफसर की तरह निर्देश देते हुए फहीम का फ़ाइल फोटो

समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता का ख़ास सिपहसलार होने के कारण विवादित फहीम के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो रही है, साथ ही फहीम की दंबगई और बढ़ती जा रही है। किसी को भी गाली दे देना, स्पष्टीकरण मांग लेना, उसके लिए आम बात होती जा रही है, जिससे आम आदमी के साथ कर्मचारी तक परेशान हैं, जिनमें कई कर्मचारी तो ऐसे हैं, जो फहीम की गुंडागर्दी से तंग आकर लंबी छुट्टी पर जाने का मन बना रहे हैं, पर ऐसा किसी ने किया, तो फहीम उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करा देगा, इस डर से सब मौन हैं और समय का इंतज़ार कर रहे हैं।

बदायूं के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में नियुक्त फहीम अहमद रिजवी को हर विभाग के कर्मचारी-अधिकारी ही नहीं, बल्कि जनपद भर के दलाल और माफिया अच्छी तरह जानते हैं। प्रदेश में सरकार चाहे जिसकी हो, पर फहीम की सेटिंग हर दल के प्रभावशाली नेता से रहती है। बसपा की सरकार में भी इसकी तूती बोलती थी, पर बदायूं में कुछ महीनों के लिए तैनात किये जिलाधिकारी एम. देवराज ने फहीम के सिंडिकेट को ही नहीं तोड़ा, बल्कि फहीम की गुंडागर्दी पर भी पूरी तरह लगाम लगा दी।

फहीम जिला ग्राम्य विकास अभिकरण का कर्मचारी कहने भर को ही है, क्योंकि सेटिंग के चलते फहीम खुद को मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय से संबद्ध करा लेता है और फिर सीडीओ के नाम पर जमकर मनमानी करता रहता है। बसपा सरकार में जब फहीम ने अति कर दी, तो उस समय जिलाधिकारी एम. देवराज ने सीडीओ को संबद्धीकरण निरस्त करने का आदेश दिया, पर सीडीओ ने कुछ नहीं किया। डीएम ने कई रिमांडर दिए थे, साथ ही सीडीओ से मौखिक रूप से भी कहा था, लेकिन फहीम और उसके आकाओं के दबाव में रहने वाले सीडीओ ने फहीम को नहीं हटाया, तो देवराज ने खुद जाकर फहीम को सीडीओ आफिस से उठा कर भगाया था और चेतावनी दी कि पुनः आकर बैठा, तो सीधे जेल जायेगा, इतना सब होने के बाद फहीम हट पाया था, लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार आते ही फहीम ने खुद को फिर सीडीओ आफिस से संबंद्ध करा लिया और जमकर मनमानी कर रहा है। चर्चा तो यहाँ तक है फहीम सीडीओ के बराबर ही कमीशन माँगता और लोग दहशत में देते हैं, जिससे कर्मचारी और अधिकारी त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।

फहीम विकास विभाग तक ही सीमित रहे, तो भी ठीक है, लेकिन उसका राज हर विभाग में चलता है। बाल विकास पर भी फहीम का पूरी तरह कब्जा है। अधिकाँश सुपरवाइजर महिलायें ही हैं, जिनका हर तरह से शोषण करता है। यह चर्चा भी आम हो चुकी है कि महिला कर्मचारियों पर एक विधायक के पास जाने का लगातार दबाव बनाता रहता है, जिससे कई महिलायें जिला छोड़ चुकी हैं और कुछ छोड़ने के प्रयास में जुटी हुई हैं। आँगनवाणी कार्यकत्रियों का भी शोषण किये जाने की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों एक सुन्दर कार्यकत्री पर विधायक के पास जाने का दबाव बना रहा था। उस कार्यकत्री ने अपने परिजनों को सब बता दिया, तो परिजन बवाल करने ही वाले थे कि फहीम ने उससे फैसला कर लिया। बताया जाता है कि उस कार्यकत्री का दो वर्ष से मानदेय नहीं निकला था और न ही उसे पोषाहार दिया जा रहा था, पर फहीम ने उसका आदेश आनन-फानन में करा कर मामला सुलटा लिया। रात-दिन ऐसे ही कुकर्मों को अंजाम देने वाले फहीम के कारण सपा के शीर्ष नेतृत्व तक पर लोग अंगुली उठाने लगते हैं, इसके बावजूद फहीम के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।

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