विधायक महेश गुप्ता की जय-जय, विश्वजीत गुप्ता की वाह-वाह

विधायक महेश गुप्ता की जय-जय, विश्वजीत गुप्ता की वाह-वाह

बदायूं जिले में आकर उप-चुनाव में भाजपा के हारने का क्रम टूट गया है भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता की रणनीति और युवा बेटे विश्वजीत गुप्ता के जोश के चलते सालारपुर ब्लॉक में प्रमुख पद पर भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गये हैं जिस अंदाज में समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी जिताया था, उससे भी बेहतर अंदाज में भाजपा ने अपना प्रत्याशी जिताया है, जिससे विश्वजीत गुप्ता की क्षेत्र में जमकर वाह-वाह हो रही है

पढ़ें: महेश चंद्र गुप्ता के आशीर्वाद से सालारपुर में अविश्वास प्रस्ताव पारित

उल्लेखनीय है कि भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता के इशारे पर ब्लॉक सालारपुर में अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई गई थी 27 फरवरी को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ था गाँव बल्लिया निवासी अशोक वर्मा के नेतृत्व में लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 76 वोट पड़े थे 84 सदस्यों में से 77 सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाये थे। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद ब्लॉक प्रमुख गेंदा देवी को हटा दिया गया था।

उप-चुनाव होने की घोषित तिथि के अनुसार 17 सितंबर को चुनाव होना था गुरुवार को नामांकन पत्र जमा होने थे, इससे पहले कुल दस नामांकन पत्र खरीदे गये थे लेकिन, निर्धारित समय तक नामांकन स्थल पर कोई नामांकन पत्र जमा करने नहीं आया तो, भाजपा प्रत्याशी अशोक वर्मा का निर्विरोध जीतना तय हो गया, जिससे भाजपाई झूम उठे। नामांकन स्थल के बाहर उपस्थित भाजपा के युवा नेता विश्वजीत गुप्ता को कंधों पर उठा कर भाजपाई नाचने-गाने लगे।

भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता पत्नी विमलेश गुप्ता और निकटस्थ लोगों के साथ तीर्थ यात्रा पर गये हुए हैं, वे 16 सितंबर को वापस लौटेंगे। माना जा रहा है कि महेश चंद्र गुप्ता चाह कर भी दबंगई नहीं दिखा सकते, जिससे वे जान कर तीर्थ यात्रा पर निकल गये और भाजपा प्रत्याशी को जिताने का दायित्व बेटे विश्वजीत गुप्ता को सौंप गये। युवा होने के बावजूद विश्वजीत गुप्ता ने न किसी को धमकाया, न किसी पर दबाव बनाया और न ही सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया, सिर्फ कुशल रणनीति से भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित करा दिया।

भारतीय जनता पार्टी सरकार बनने के बाद से उप-चुनावों में निरंतर हार रही है हाल ही में पड़ोसी जिला संभल के वार्ड पवांसा से कैबिनेट मंत्री गुलाबो देवी की बेटी क्षेत्र पंचायत सदस्य का उप-चुनाव हार गई थी। भाजपा के हारने का क्रम बदायूं में आकर टूटा है, जिसके पीछे विधायक महेश चंद्र गुप्ता की रणनीति और विश्वजीत गुप्ता का जोश ही कहा जायेगा।

पढ़ें: दबाव में तीस क्षेत्र पंचायत सदस्यों की नजर कमजोर कर दी

यह भी बता दें कि समाजवादी पार्टी की सरकार में हुए चुनाव में सत्ता पक्ष के दबाव में तीन डॉक्टरों के पैनल ने तीस सदस्यों को कमजोर दृष्टि होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, इन प्रमाण पत्रों के सहारे सत्ता पक्ष के नेता का इरादा सदस्यों को सहायक दिलाने का था उप-चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अशोक वर्मा के जीतने के कारण सत्ता ही है लेकिन, महेश चंद्र गुप्ता और उनके बेटे विश्वजीत गुप्ता के कार्य करने का अंदाज सपाईयों से बेहतर रहा तभी, सत्ता पर बदनामी का दाग नहीं लग रहा है

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