विवादित सौर ऊर्जा प्लांट में जीएम की मनमानी से मजदूर की मौत

विवादित सौर ऊर्जा प्लांट में जीएम की मनमानी से मजदूर की मौत

बदायूं जिले में निर्माणाधीन विवादित सौर ऊर्जा प्लांट में शाहजहाँपुर जिले के एक मजदूर की अचानक हालत बिगड़ गई जीएम ने मजदूर को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी भी नहीं दी, जिससे मजदूर ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया मृत्यु के बाद साथी मजदूरों ने आक्रोश जताया, तो आस-पास के थानों से पुलिस बल बुला कर आवाज को दबा दिया गया पुलिस ने दबंग जीएम का साथ देते हुए शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया

तहसील दातागंज क्षेत्र के गाँव रिजौला, माधुरी नगला, गौरी नगला, गोमिद नगला और रौता के रकवे में केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत 2 सौ 30 करोड़ की लागात से सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जा रहा है, इसमें स्थानीय और बाहरी तमाम मजदूर कार्य कर रहे हैं बताते हैं कि लोहा उठाते समय शाहजहाँपुर जिले में स्थित परौर थाना के गाँव गढ़ी खजुरी निवासी शिव कुमार सिंह (23) पुत्र धर्मेन्द्र सिंह की हालत अचानक खराब हो गई शिव कुमार को खून की उल्टियाँ होने लगीं, तो साथी मजदूर घबरा गये मजदूर दौड़ते हुए जीएम के पास गये और शिव कुमार को अस्पताल ले जाने का आग्रह किया, लेकिन जीएम ने कोई रूचि नहीं दिखाई गाड़ी देने से भी मना कर दिया और जीएम ने सभी को डांट कर काम पर जुट जाने को कहा

शिव कुमार खून की उल्टियाँ करते हुए बेहोश हो गया, तो किसी मजदूर ने ही फोन कर पड़ोस के गाँव से गाड़ी मंगवाई और फिर उसे डॉक्टर के पास लेकर गये, तो डॉक्टर ने शिव कुमार को मृत घोषित कर दिया मजदूर शव लेकर लौट आये और आक्रोश व्यक्त करने लगे, तो जीएम अपने केबिन में बंद हो गया एवं आस-पास के थानों से बड़ी संख्या में पुलिस बल बुला लिया दातागंज के सीओ भी पहुंच गये और उल्टा मजदूरों को ही डांटते रहेबताते हैं कि मृतक के माता-पिता मर चुके हैं एवं चार भाईयों में सबसे बड़ा शिव कुमार ही था, जो छोटे भाईयों को पाल रहा था शिव कुमार के मरने से छोटे भाई अनाथ हो गये हैं घटना की सूचना के बाद भाई और खानदान के लोग आये, तो पुलिस ने दबाव बना कर उन्हें शव के साथ लौटा दिया, जबकि पुलिस को पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। कानूनी औपचारिकता हुई होती, तो मृतक आश्रितों को सरकार से आर्थिक मदद मिल सकती थी। पुलिस की मनमानी से मजदूर वर्ग बेहद दुखी हैं।

उल्लेखनीय है कि प्लांट लगाने के लिए भी ठेकेदार कंपनी ने नियमों और शर्तों की धज्जियां उड़ा दी हैं कंपनी ने पहले कुछ किसानों को नौकरी का लालच देकर और रूपये देकर जमीनों का बैनामा करा लिया किसानों को अंग्रेजी में लिखा हुआ पत्र दिया गया, जो ऑफर लेटर निकला, जबकि किसानों को नियुक्ति पत्र बताया गया थाकंपनी की ओर से बैनामा कराते समय तमाम किसानों को चैक भी दिए गये थे, जो बाउंस हो गये हैं, क्योंकि कंपनी के खाते में धन ही नहीं है किसानों की जमीन चली गई, लेकिन नियुक्ति पत्र की जगह उन्हें ऑफर लेटर थमा दिया और जो चैक दिया गया है, वह कागज के रद्दी के टुकड़े जैसा ही है, इस सबके साथ ही हजारों एकड़ जमीन को घेर लिया गया है, जबकि बाउंड्री के अंदर के तमाम किसान अपनी जमीन किसी भी कीमत पर बेचने को तैयार नहीं हैं एवं कंपनी ने गाँव रिजौला, माधुरी नगला, गौरी नगला, गोमिद नगला और रौता की सैकड़ों बीघा ग्राम समाज की भी जमीन ने कब्जा ली है। पीड़ित किसान निरंतर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन उच्च स्तरीय राजनैतिक संरक्षण के चलते किसानों की शिकायतों पर जाँच तक नहीं की जा रही है।

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