नई शराब नीति की सफलता में बाधक बन रहा है फॉर्म जी- 39

नई शराब नीति की सफलता में बाधक बन रहा है फॉर्म जी- 39

उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब नीति बदल दी है। नई शराब नीति के अंतर्गत दुकानें आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इस वर्ष बड़े और परंपरागत कारोबारी ही हावी रहने वाले हैं। तमाम लोग शराब की दुकान लेने के इच्छुक हैं, लेकिन फॉर्म जी- 39 के कारण नये लोग टेंडर नहीं डाल सकेंगे। अगर, डीएम द्वारा जारी किये गये हैसियत प्रमाण पत्र को मान्यता दे दी जाये, तो नये लोग भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो जायेंगे।

उत्तर प्रदेश में शराब कारोबारियों ने सरकार की खुली मदद के चलते माफिया का रूप धारण कर लिया था। मुलायम सरकार में शराब माफिया और अधिक फले-फूले। माया सरकार ने नई नीति बना कर माफियाओं को और मजबूत कर दिया, जिसके बाद अखिलेश सरकार ने भी मायावती की शराब नीति को ही फॉलो किया। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने शराब नीति को बदल दिया है, अब प्रत्येक दुकान का टेंडर निकाला जायेगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।

शराब नीति बदलने से प्रदेश का बड़ा तबका खुश था। कुछ लोग इसलिए खुश थे कि अब क्वालिटी अच्छी मिल सकेगी, वहीं कुछ लोग रोजगार की संभावनायें तलाशने लगे, स्वयं दुकान लेने का मन बनाने लगे, जिसके चलते लोगों ने जरूरी कागजात तैयार करा लिए, लेकिन फॉर्म जी- 39 ने लोगों का उत्साह मायूसी में बदल दिया है।

टेंडर डालने के लिए आधार कार्ड, गत वर्ष का आईटीआर, चरित्र प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, बैंक एकाउंट और एक मोबाईल नंबर होना चाहिए, इस सबकी नये लोगों ने तैयारी कर ली थी, लेकिन अंत में बताया गया कि डीएम द्वारा जारी किया गया हैसियत प्रमाण पत्र नहीं माना जायेगा, उसकी जगह विभागीय फॉर्म जी- 39 लेना होगा, जिस पर हैसियत प्रमाणित करानी होगी। हालाँकि जी- 39 फॉर्म भी डीएम द्वारा ही प्रमाणित किया जायेगा, इस फॉर्म के चलते नये लोग टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

शराब से जुड़े कारोबारियों को पहले से ही विभागीय जानकारी थी, जिससे उन्होंने तैयारी कर रखी थी, उनके पास विश्वत टीम भी हैं, उन्होंने अपने निजी सेल्समेन के नाम से कागजात तैयार करा लिए हैं, इसलिए इस वर्ष बड़े और परंपरागत कारोबारी ही दुकानें झटक ले जायेंगे, क्योंकि नये लोग अब फॉर्म जी- 39 पर आवेदन करें, तो तय समय के अंदर वे प्रमाणित ही नहीं करा पायेंगे। आबकारी विभाग और प्रशासन पर बड़े कारोबारियों का दबाव भी है, जिससे नये लोगों के आवेदन लटकाये जा रहे हैं, जबकि कारोबारियों के आवेदनों पर तत्काल रिपोर्ट लगाई जा रही है। नई नीति को सफल बनाने के लिए सरकार डीएम द्वारा जारी किये गये हैसियत प्रमाण पत्र को ही मान्यता देने का निर्देश जारी करे, तभी नये लोग शामिल हो पायेंगे।

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