समसामायिकी ग्रुप की तरह सोशल साइट्स का करें सदुपयोग

समसामायिकी ग्रुप की तरह सोशल साइट्स का करें सदुपयोग
नांद में पानी पीती गाय।
नांद में पानी पीती गाय।

सोशल साइट्स का दौर चल रहा है। बड़ी संख्या में लोग सोशल साइट्स से जुड़ चुके हैं। एक बहुत बड़े वर्ग का जीवन का हिस्सा बन गई हैं सोशल साइट्स। सोशल साइट्स को गंभीरता से न लेने वाले लोग भी हैं, वहीं सोशल साइट्स का दुरूपयोग करने वाले भी बड़ी संख्या हैं, लेकिन ऐसे लोग भी हैं, जो सोशल साइट्स का सदुपयोग कर रहे हैं। अर्थ, साहित्य, संगीत, प्रकृति, रोजगार, राजनीति, महिला, बचपन, बुजुर्ग, अन्न, जीव और जन्तुओं से संबंधित जागरूकता अभियान चला रहे हैं और उसके बड़े ही सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

वाट्सएप पर ऐसा ही एक ग्रुप है “समसामायिकी”, इस ग्रुप के एडमिन हैं मृगांक शेखर उपाध्याय। मृगांक ने भीषण गर्मी में जानवरों को पीने के पानी की समस्या को लेकर अपने दरवाजों के सामने एवं मोहल्ले में नांद रखने का सुझाव रखा। जो लोग समय के अभाव में स्वयं जाकर नहीं खरीद सकते, उन्हें नांद उपलब्ध कराने की सहूलियत दी, तो उनके सुझाव को ग्रुप के सदस्यों ने हाथों-हाथ लिया।

समसामायिकी ग्रुप से पत्रकार, अफसर, नेता और सामाजिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग जुड़े हुए हैं। अधिकांशतः लखीमपुर के रहने वाले हैं, उनमें से तमाम लोग अपने घर के सामने नांद खरीद कर रख चुके हैं, जिसमें वे सुबह-शाम पानी भी भरते हैं। पीने के पानी को भटकने वाले आवारा जानवर नांद की ओर आने लगे हैं। मुख्य रूप से मोहल्लों में गाय ही भटकती रहती हैं, इस नांद अभियान का बड़ा लाभ गाय को भी मिल रहा है। तमाम लोग नांद खरीद चुके हैं एवं तमाम लोग खरीदने का वचन दे चुके हैं, इससे समाज के बीच एक बड़ा ही अच्छा संदेश जा रहा है।

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