शराब माफिया के गुलाम पुलिस कर्मियों को बचा रहे हैं अफसर

शराब माफिया के गुलाम पुलिस कर्मियों को बचा रहे हैं अफसर

मुरादाबाद में शराब माफियाओं की गुंडई के बाद पुलिस की भूमिका की भी पोल भी खुल गई है। मुरादाबाद की पुलिस शराब माफियाओं की अघोषित रूप से गुलाम निकली है लेकिन, अफसर शराब माफियाओं के गुलामों को बचाने में जुटे हुए हैं, जबकि प्रकरण का खुलासा होते ही दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई हो जानी चाहिए थी।

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उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें शराब माफिया के दबंग कथित मैनेजर तीन युवकों को पूरी तरह नंगा कर एक-दूसरे से पिटवाते नजर आ रहे हैं। भयावह दृश्य कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने को काफी था, क्योंकि युवकों के साथ गुलामों से भी बदतर हरकत की जा रही थी। उक्त प्रकरण में अब एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शराब माफियाओं ने तीनों युवकों के साथ दरिंदगी करने के बाद युवक पुलिस के हवाले कर दिए थे और सिविल लाइन थाना पुलिस ने तीनों युवकों को 52 पौव्वों के साथ गिरफ्तार दर्शा कर जेल भेज दिया था।

तीनों युवकों को शराब माफिया के नवीगंज कार्यालय में बंधक बना कर पीटा गया था, जिसके बाद पुलिस के हवाले कर दिए गये थे। पुलिस ने तीनों को जेल भेज कर गुडवर्क कर लिया और अपनी पीठ थपथपा ली। उक्त प्रकरण में एक युवक की पत्नी ने प्रार्थना दिया पर, उस पर कार्रवाई नहीं की गई, साथ ही पुलिस कह रही है कि प्रार्थना पत्र आयेगा तो, कार्रवाई की जायेगी, जबकि पूरा प्रकरण स्पष्ट है। वीडियो और कागजी कार्रवाई सामने है, जिससे यह सिद्ध हो रहा है कि माफियाओं ने दरिंदगी की और सिविल लाइन थाना पुलिस माफियाओं की गुलाम है, इस प्रकरण में पुलिस अफसरों को स्वतः कार्रवाई करना चाहिए, क्योंकि जो माफिया पीटने के बाद पुलिस से कार्रवाई करा सकते हैं, उनके विरुद्ध किसी में बोलने का साहस कहां से आयेगा।

उक्त घटना क्रम से यह भी सिद्ध हो रहा है कि नई शराब नीति बनने के बावजूद माफिया राज बरकरार है। उक्त घटना क्रम समूचे सिस्टम को कठघरे में खड़ा करने को काफी है, यह प्रकरण मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है, जिस पर त्वरित कार्रवाई हो जाना चाहिए थी। शीर्ष अफसरों के संज्ञान में प्रकरण पहुंचने के बावजूद कार्रवाई न होना और भी दुःखद है।

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