प्रशासन के अवरोध के बावजूद छा गया स्मृति वंदन का छठा महोत्सव

प्रशासन के अवरोध के बावजूद छा गया स्मृति वंदन का छठा महोत्सव

बदायूं की सांस्कृतिक, साहित्यिक व सामाजिक संस्था स्मृति वंदन का छठा महोत्सव रविवार को भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे के साथ सम्पन्न हो गया। यूनियन क्लब में समारोह का उद्घाटन सुप्रसिद्ध साहित्यकार उदय प्रताप सिंह, पदम् श्री डाॅ. अशोक चक्रधर, वसीम बरेलवी, सांसद धर्मेन्द्र यादव के प्रतिनिधियों, पूर्व विधायक मुस्लिम खाँ, तथा पूर्व डीसीबी चेयरमैन व लोकप्रिय युवा सपा नेता ब्रजेश यादव, जिला पंचायत की अध्यक्षा मधुचन्द्रा और मौलाना डाॅ. यासीन उस्मानी ने माँ शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

शायर ताहिर फ़राज ने पढ़ा कि

गम इसका कुछ नहीं के मैं काम आ गया
गम ये है कातीलों में तेरा नाम आ गया

पद्म श्री डाॅ. अशोक चक्रधर ने पढ़ा कि

चलती रहीं, चलती रहीं, चलती रहीं बातें
यहाँ की, वहाँ की, इधर की, उधर की
इसकी, उसकी, जाने किस-किस की बातें

मुक्तक सम्राट भूराज सिंह राजलाॅयर ने पढ़ा कि

मार्तन्ड की किरणें तम के सम्मुख नहीं झुका करती हैं
वेगवान धारायें जल की रोकें नहीं रूका करती हैं
प्रसादों के सुघढ़ कंगूरों का विध्वंश हुआ करता है
किन्तु योगियों की जंगल मे कुटियां नहीं लुटा करती हैं

चरण सिंह बशर ने पढ़ा कि

आइना कौन है कुछ पता तो चले
बे-ख़ता कौन है कुछ पता तो चले

वसीम बरेलवी ने पढ़ा कि

अपने चेहरे से जो जाहिर है छुपायें कैसे
तेरी मर्जी के मुताबिक नजर आयें कैसे

शबीना अदीब ने पढ़ा कि

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है

अध्यक्षता कर रहे उदय प्रताप सिंह ने पढ़ा कि

फूल से बोली कली क्यों व्यस्त मुरझाने में है
फायदा क्या गंध औ मकरंद बिखराने में है
तूने अपनी उम्र क्यों वातावरण में घोल दी
अपनी मनमोहक पंखुरियों की छटा क्यों खोल दी

प्रदीप चौबे ने पढ़ा कि

हर तरफ गोलमाल है साहब
आपका क्या ख़याल है साहब
कल का भगुआ चुनाव जीता तो
आज भगवत दयाल है साहब

निज़ामत कर रहे नदीम कर्रूख ने पढ़ा कि

अल्फाज बिक रहे थे ख़रीदे नहीं गए
स्कूल हम गरीबों के बच्चे नहीं गए

सम्पत सरल ने पढ़ा कि

वे भी क्या दिन थे जब घड़ी एकाध के पास थी और समय सबके पास
आज की तरह नहीं था कि फेसबुक पर 5000 मित्र हैं और परिवार में बोलचाल नहीं है
तब मोबाइल तो क्या लैंडलाइन भी नहीं होता था
अतः झूठ सिर्फ आमने सामने मिलने पर ही बोला जाता था

इससे पहले प्रमुख अतिथियों और साहित्यकारों को माल्यार्पण कर, प्रतीक चिन्ह देकर एवं शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। अंत में संयोजक भानु प्रताप “भानु” ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह भी बता दें कि स्मृति वंदन की टीम को प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं किया जाता है, साथ ही प्रशासन ने महोत्सव को असफल कराने का भी प्रयास किया। भव्य समारोह से पहले महोत्सव से संबंधित प्रचार सामग्री प्रशासन ने अभियान चलवा कर हटवा ली पर, इस सबसे स्मृति वंदन समिति के साहस और उत्साह में कोई अंतर नहीं आया और न ही प्रशासन आम जनता को सहभागी बनने से रोक सका।

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