समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव के दबाव में है पुलिस-प्रशासन

बदायूं जिले का पुलिस-प्रशासन दबाव में नजर आ रहा है। आचार संहिता लगते ही पुलिस-प्रशासन ने राजनैतिक दलों के रंग और चिन्ह दबा दिए थे लेकिन, सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव का बोर्ड खुलेआम पुलिस-प्रशासन को आज भी चिढ़ा रहा है। चर्चा है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन धर्मेन्द्र यादव के दबाव में है।

लोकसभा चुनाव को लेकर 10 मार्च 2019 को आचार संहिता लागू की गई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त जिस समय पत्रकारों को दिल्ली में संबोधित कर रहे थे, उसी समय जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह और एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने पैदल घूम कर राजनैतिक दलों के बैनर, पोस्टर और होर्डिंग उतरवा दिए थे, नेताओं के पदनाम लिखे बोर्ड ढकवा दिए थे। भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता, भाजपा विधायक धर्मेन्द्र शाक्य, कांग्रेस प्रत्याशी सलीम इकबाल शेरवानी और प्रसपा के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र यादव के आवासों पर लगे बोर्ड भी ढक दिए गये थे, साथ ही कैबिनेट मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा पौधारोपण किया गया था, जिस पर उनके नाम की लगी पट्टिका को भी ढक दिया गया था, जिसको लेकर पुलिस-प्रशासन की वाह-वाह हुई थी।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के दलों व नेताओं के नाम ढकने में जिस पुलिस-प्रशासन ने देर नहीं की, उसी पुलिस-प्रशासन ने आज 21 मार्च तक सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव के बोर्ड की सुध नहीं ली है। धर्मेन्द्र यादव की कोठी पर लगा बोर्ड आज भी पुलिस-प्रशासन को चिढ़ा रहा है। बता दें कि धर्मेन्द्र यादव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के भाई हैं, जिससे चर्चा है कि पुलिस-प्रशासन उनके दबाव में है तभी, उनका बोर्ड आज तक खुला हुआ है।

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