तेजतर्रार डीएम और तेजतर्रार एसएसपी का अधीनस्थों पर क्यों नहीं है खौफ?

तेजतर्रार डीएम और तेजतर्रार एसएसपी का अधीनस्थों पर क्यों नहीं है खौफ?

बदायूं के जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार की कार्य प्रणाली की प्रशंसा प्रदेश स्तर पर की जा रही है लेकिन, जिले के पुलिस-प्रशासन में ऐसे-ऐसे घाघ तैनात हैं, जिन पर तेजतर्रार माने जा रहे अफसरों का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा। तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में लापरवाही और भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त नजर आ रही है।

जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने राशन वितरण प्रणाली पर ऐसा शिकंजा कसा है कि उनकी योजना प्रदेश स्तर पर लागू की जा रही है। दौरे पर निकलते हैं तो, डग्गामार वाहनों को रुकवा कर न सिर्फ चेतावनी देते हैं बल्कि, कार्रवाई भी करते हैं। शनिवार को सड़क पर पड़े घायल देखे तो, काफिला रुकवा कर खुद सड़क पर खड़े हो गये और घायलों को अस्पताल भिजवा कर ही आगे बढ़े। शस्त्र लाइसेंस बनाने में पारदर्शिता बरत रहे हैं। वारिशों के लाइसेंस जारी कर नाम प्रकाशित करा रहे हैं, इस सबके बावजूद शस्त्र कार्यालय में कर्मचारी लाइसेंस धारकों से रिश्वत लेते देखे जा सकते हैं। यह सवाल आम होता जा रहा है कि तेजतर्रार डीएम का अधीनस्थों पर खौफ क्यों नहीं है?

इसी तरह एसएसपी अशोक कुमार की पारदर्शी विवेचना की योजना प्रदेश स्तर पर सराही जा रही है और अन्य जनपदों में लागू करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने बिना हेल्मेट के पेट्रोल देने पर रोक लगवा दी है, जिससे दोपहिया वाहन स्वामी प्रभावित हो रहे हैं। एसएसपी की योजना की प्रशंसा की जा रही है लेकिन, जिले भर में डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। सिविल लाइंस, उझानी, वजीरगंज, बिनावर, बिसौली, फैजगंज बेहटा, बिल्सी, सहसवान, मूसाझाग, अलापुर और दातागंज पुलिस खुलेआम डग्गामार वाहन चलवा रही है, इसमें यातायात पुलिस की भी मिलीभगत है, सो यह सवाल भी आम होता जा रहा है कि तेजतर्रार एसएसपी का खौफ अधीनस्थों पर क्यों नहीं है?

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