लिव-इन-रिलेशनशिप में हैं साक्षी और अजितेश, फर्जी है विवाह का प्रमाण पत्र

लिव-इन-रिलेशनशिप में हैं साक्षी और अजितेश, फर्जी है विवाह का प्रमाण पत्र

बरेली जिले के विधान सभा क्षेत्र बिथरी चैनपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजेश कुमार मिश्रा “पप्पू भरतौल” की बेटी साक्षी “सीनू मिश्रा” और दलित युवक अजितेश कुमार के जिस विवाह पर बवाल मचा हुआ है, वह विवाह हुआ ही नहीं है। जिस मंदिर में विवाह करने का दावा किया जा रहा है, उस मंदिर में साक्षी और अजितेश कभी गये ही नहीं हैं। हालाँकि साथ रहने के लिए बालिग लड़के-लड़की को विवाह करने की बाध्यता नहीं है, वे कानूनी रूप से साथ रह सकते हैं पर, हाल-फिलहाल वे पति-पत्नी के रूप में नहीं बल्कि, लिव-इन-रिलेशनशिप में माने जायेंगे, साथ ही विवाह का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के भी दोषी हैं।

साक्षी और अजितेश ने वीडियो वायरल कर प्रदेश ही नहीं बल्कि, देश भर में हंगामा कर दिया। साक्षी और अजितेश ने विधायक पप्पू भरतौल और उनके बेटे विक्की भरतौल पर पीछा करवाने का आरोप लगाया एवं जान को खतरा भी बताया, इस पर बरेली की पुलिस ने सुरक्षा मुहैया करा दी एवं विधायक पप्पू भरतौल व उनके बेटे विक्की भरतौल ने साक्षी और अजितेश के आरोप का खंडन भी कर दिया। विधायक और उनके बेटे ने स्पष्ट कहा कि लड़की निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है एवं वे पीछा भी नहीं कर रहे हैं, इसके बावजूद बयानबाजी की जा रही है, जिससे बवाल थम नहीं रहा है।

खैर, वीडियो वायरल करते समय साक्षी और अजितेश ने इलाहाबाद में ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र के बेगम सराय में स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर में विवाह करने का प्रमाण पत्र भी जारी किया। गौतम संदेश प्राचीन राम जानकी मंदिर पर पहुंचा। पूरे इलाके में मंदिर के बारे में कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था। इलाहाबाद के बाहर जीर्ण-क्षीर्ण सड़कों पर चलते हुए और बेहद गंदी बस्ती को पार करते गंगा किनारे जाकर बता चला कि जिस मंदिर में विवाह करने का दावा किया जा रहा है, वह यही है।

मंदिर परिसर में पहुंचे तो, वहां पहले से इस विवादित विवाह की चर्चा चल रही थी। अधिवक्ता यादवेन्द्र पांडेय, अधिवक्ता सोम नारायण मिश्रा और अधिवक्ता धर्मराज चौधरी सहित तमाम ग्रामीण और संत मंदिर को बदनाम करने को लेकर निंदा कर रहे थे। अधिवक्ता यादवेन्द्र पांडेय ने बताया कि जिस क्षेत्र में मंदिर स्थित है, उसे गयासुद्दीनपुर और भागलपुरवा के नाम से जाना जाता है। दो सौ वर्ष से भी पुराने मंदिर का पूरा नाम राम जानकी हनुमान मंदिर है, जिसमें हुनमान जी का विग्रह और अधिक प्राचीन है। मंदिर का संबंध अयोध्या के राम जनकी मंदिर से बताया जाता है।

मंदिर परिसर में भागवत कथा चल रही है, जो गौतम संदेश के पहुंचने से कुछ देर पहले ही संपन्न हुई थी। मंदिर के प्रमुख महंत परशुराम नाथ नागा हैं, जो चालीस वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं, वे मंदिर से बाहर मोहल्ले तक में कभी नहीं जाते। बाबा ने बताया कि साक्षी और अजितेश यहाँ कभी नहीं आये हैं और न ही उनके विवाह का प्रमाण पत्र यहाँ से जारी किया गया है। बोले- उनकी जगह कोई और संत होता तो, फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले पर मुकदमा दर्ज करा देता।

विवाह के फर्जी प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी की गई तो, पता चला कि मंदिर से लगभग पांच सौ मीटर दूर आचार्य विश्वपति जी शुक्ल का एक निर्माणाधीन मकान है, उस मकान के स्वामी का ही नाम फर्जी प्रमाण पत्र पर छपा हुआ है। बताते हैं कि विवाह की बात जिस दिन से सार्वजनिक हुई है, उसी दिन से विश्वपति नहीं आये हैं और मकान का निर्माण कार्य भी रुका हुआ है। प्राचीन मंदिर को विवाद से जोड़ने के कारण अधिकांश लोग विश्वपति से नाराज नजर आ रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि जब साक्षी और अजितेश कभी मंदिर में गये ही नहीं, उनका विवाह हुआ ही नहीं, प्रमाण पत्र फर्जी है तो, साक्षी और अजितेश पति-पत्नी कैसे हो गये? जो रिश्ता झूठ की नींव पर ही शुरू हुआ है, वह रिश्ता कितने दिन निभ पायेगा?, यह तो समय ही तय करेगा। हालाँकि बालिग युवक-युवती विवाह के बिना भी साथ रह सकते हैं पर, उन्हें पति-पत्नी नहीं कहा जा सकता, वे दोनों परंपरा और कानून के अनुसार लिव-इन-रिलेशनशिप में कहे जायेंगे, साथ ही विवाह का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के भी दोषी हैं।

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