पिस्टल कांड में थाना बन गया मंडी, 70 लाख लेकर छोड़ दिए प्रतिष्ठित अभियुक्त

पिस्टल कांड में थाना बन गया मंडी, 70 लाख लेकर छोड़ दिए प्रतिष्ठित अभियुक्त

बदायूं जिले की पुलिस जमकर और खुलकर मनमानी करती नजर आ रही है। ताकतवर अमीरों को छोड़ने के कारण पिस्टल कांड छाया हुआ है। गरीबों को जेल भेज कर पुलिस खुद की पीठ थपथपाती नजर आ रही है, साथ ही आम जनता से भी वाह-वाही की अपेक्षा कर रही है लेकिन, अज्ञात डर के चलते पुलिस अफसरों के चेहरों का रंग उड़ा हुआ है।

दावा है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अपराधी धरपकड़ अभियान के अन्तर्गत अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) के पर्यवेक्षण में तथा क्षेत्राधिकारी (नगर) के कुशल नेतृत्व में थाना सिविल लाइन पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर जवाहरपुरी में स्थित इखलाश खान के रोजा में अवैध रुप से अवैध शस्त्रों की खरीद-बेच के सम्बन्ध में दबिश देकर 9 अभियुक्तों को अवैध 8 पिस्टल 32 बोर मय 38 जिन्दा कारतूस 32 बोर व 7 मोबाइल तथा 11, 300 रूपये सहित गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ में अभियुक्तगणों द्वारा बताया गया कि इन पिस्टलों को स्थानीय स्तर पर शिवम पुत्र विनोद गुप्ता निवासी गली नंबर- 5 शिवपुरम, थाना कोतवाली, हम लोगों को देता है, जिन्हे हम लाभ लेकर ग्राहक तलाश कर बेचते हैं। बाहर से पिस्टलों की खेप आने पर शिवम हमको सूचना देता है तभी, हम लोग पिस्टलें लेने आते हैं तथा स्थान व समय शिवम के द्वारा ही तय किया जाता है। गिरफ्तार किये गये भूरा उर्फ सरफराज पुत्र फुरकुन्द अली निवासी वार्ड- 21 कस्बा ककराला, सलीम पुत्र फुन्दन निवासी वार्ड- 4 कस्बा ककराला, अमित पुत्र दुर्गपाल निवासी मोहल्ला नागरान, थाना कोतवाली, रिंकू जोशी पुत्र बिजेन्द्र पाल निवासी मोहल्ला अल्फा खां सराय थाना कोतवाली, गौस मोहम्मद उर्फ करीम पुत्र हाजी लईक निवासी मोहल्ला चौधरी सराय, थाना कोतवाली, मसरूर पुत्र एजाज निवासी मई थाना चन्दौसी जिला सम्भल, फन्ना उर्फ इरफान पुत्र अब्दुल मजीद निवासी सैदपुर थाना वजीरगंज, पंकज उर्फ पवन भारद्वाज पुत्र कैलाश निवासी मोहल्ला हुसैनी गली, थाना कोतवाली और विनोद गुप्ता पुत्र श्रीकृष्ण गुप्ता निवासी नंबर- 5 शिवपुरम, थाना कोतवाली को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि शिवम फरार है।

पुलिस ने गिरफ्तार किये गये अभियुक्तों को आर्म्स एक्ट के अंतर्गत जेल भेजा है, जबकि अभियुक्तों से अत्याधुनिक पिस्टलें बरामद हुई हैं, जिनके साथ प्रतिबंधित कारतूस भी बरामद किये गये हैं लेकिन, पुलिस ने अभियुक्तों पर इस तरह कार्रवाई की है, जैसे वे गाँव-मोहल्ले में बनने वाले देशी कट्टों का धंधा कर रहे हों। संगठित गिरोह देश के विरुद्ध जघन्य अपराध कर रहा था, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई करने की जगह पिस्टल कांड को पुलिस पूरी तरह दबाने में जुटी हुई है, साथ ही गुड वर्क प्रचारित करती नजर आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि एक गन हाउस का स्वामी चेयरमैन रहा है, वही पूरे धंधे का सरगना है। पुलिस ने बुधवार की रात में गन हाउस के स्वामी और उसके बेटे को हिरासत में ले लिया था। पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि हाल ही में दो डॉक्टर, एक चर्चित स्वीट विक्रेता, घी व्यवसाई और कई नेताओं ने पिस्टल और कारतूस खरीदे हैं। जिले के बाहर भी पिस्टल भेजे गये हैं। पुलिस ने पिस्टल खरीदने वाले स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों को हिरासत में ले लिया तो, थाना मंडी बन गया।

सूत्रों का कहना है कि प्रतिष्ठित लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए पुलिस के सामने स्वयं ही बोली लगानी शुरू कर दी। सूत्रों का कहना है कि 70 लाख से भी अधिक रूपये वसूलने के बाद पुलिस ने 16 प्रतिष्ठित लोगों को बीती रात मुक्त कर दिया। पूर्व चेयरमैन ने अपनी और बेटे की जगह नौकर को पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके हाव-भाव बता रहे हैं कि वह स्वार्थ और डर में फंसाया जा रहा है। हालाँकि एएसपी ने सवाल पर यह भी स्पष्ट किया कि पिता-पुत्र संदिग्ध हैं, उन्हें दोषी पाये जाने पर गिरफ्तार किया जा सकता है।

गुड वर्क पर एसएसपी बेहद खुश होते हैं और हमेशा स्वयं ही प्रेस वार्ता करते हैं लेकिन, इस प्रकरण में एसएसपी सामने नहीं आये, उनकी जगह एएसपी (नगर) ने प्रेस वार्ता की। डीजीपी के स्तर से उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की गहनता से जाँच की गई तो, निश्चित ही पुलिस कर्मियों और अफसरों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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