प्रधानाध्यापिका के पास सिर्फ त्याग पत्र और आत्म हत्या का ही विकल्प बचा है

प्रधानाध्यापिका के पास सिर्फ त्याग पत्र और आत्म हत्या का ही विकल्प बचा है

बदायूं जिले में महिलाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। आम महिलायें यौन उत्पीड़न का शिकार होती रहती हैं, अब शिक्षित और कामकाजी महिलायें भी सुरक्षित नहीं हैं। बच्चों के माध्यम से देश का भविष्य गढ़ने का जिस शिक्षिका पर अहम दायित्व है, वह शिक्षिका स्वयं यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही है। विभागीय और प्रशासनिक अफसरों के साथ संगठन के नेताओं से गुहार लगा कर थक चुकी शिक्षिका त्याग पत्र देने एवं आत्म हत्या करने के कगार पर पहुंच गई है।

सनसनीखेज प्रकरण विकास क्षेत्र जगत का है। क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात महिला का कहना है कि उसकी ग्राम पंचायत में महिला प्रधान है पर, आरोप है कि महिला प्रधान की जगह उसका पति मुन्ना लाल यादव ही काम करता है। मुन्ना लाल यादव ग्राम पंचायत सचिव है और अपने संगठन का नेता है, जिससे राजनैतिक संबंधों के चलते दबंग भी है। आरोप है कि गाँव में तीन विद्यालय हैं, दो विद्यालयों में पुरुष शिक्षक हैं, उसके विद्यालय में उसके अलावा दो महिला शिक्षामित्र भी हैं, जिससे मुन्ना लाल यादव सिर्फ उसके विद्यालय में दबंगई करता है।

पीड़िता का आरोप है कि मुन्ना लाल यादव की नीयत खराब है, जिससे वह स्कूल में कई लोगों के साथ अक्सर आ जाता है और रजिस्टर खंगालने लगता है, निरर्थक सवाल करता है, कुर्सी पर आकर बैठ जाता है, फोटो खींचता है, वीडियो बनाता है, जिसकी दहशत में वह अक्सर छुट्टी ले लेती है। पीड़िता छुट्टी पर चली जाती है तो, मुन्ना लाल यादव स्कूल में नहीं आता। वह शिक्षामित्रों से फोन पर उसके बारे में पूछता रहता है और उसके आते ही फिर स्कूल आने लगता है।

एमडीएम संचालित करने के लिए प्रधान के चेक पर हस्ताक्षर होते हैं, जिसके लिए घर पर आने को कहता है तो, पीड़िता ने घर पर जाने को मना कर दिया। पीड़िता ने एमडीएम का संचालन प्रधान को ही सौंप दिया, जिससे दो माह से एमडीएम बंद है, इसके बावजूद मुन्ना लाल यादव की हरकतें बंद नहीं हुईं तो, पीड़िता ने एबीएसए और बीएसए को अवगत कराया। एबीएसए ने कह दिया कि संगठन के नेताओं को बताओ। पीड़िता ने नेताओं को बताया तो, जवाब मिला कि प्रशासनिक अफसरों से शिकायत करो।

पीड़िता ने दो माह पूर्व डीएम से लिखित शिकायत की। डीएम ने एसडीएम और मनरेगा के डीसी को जाँच सौंप दी लेकिन, महत्वपूर्ण होते हुए भी दो माह तक वे जाँच करने ही नहीं जा सके। 7 दिसंबर को एसडीएम और डीसी जाँच करने पहुंचे तो, आरोपी मुन्ना लाल यादव भी मौके पर पहुंच गया और अफसरों से भी अभद्रता करने लगा, जिसको गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने एसओ को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश दिया लेकिन, राजनैतिक पहुंच होने के कारण एसओ ने कार्रवाई नहीं की।

पीड़िता हर स्तर पर गुहार लगा चुकी है पर, उसकी सुरक्षा की चिंता किसी को नहीं है, वह थक चुकी है। पीड़िता ने रोते हुए कहा कि अब उसके पास एक मात्र विकल्प यही है कि वह नौकरी से त्याग पत्र दे दे अथवा, आत्म हत्या कर ले। देखना यह है कि विभागीय, पुलिस और प्रशासन के अफसरों के साथ संगठन के नेता पीड़िता के त्याग पत्र देने का इंतजार करेंगे या, आत्म हत्या करने का?

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