दुनिया में हिंदुस्तान और लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रहा है विपक्ष: शाह

दुनिया में हिंदुस्तान और लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रहा है विपक्ष: शाह

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्ष द्वारा ईवीएम को लेकर जारी अनर्गल प्रलाप एवं देश में अराजकता फैलाने के उनके कुत्सित षड्यंत्र को लेकर जम कर हमला बोला और विपक्ष से छः प्रश्न पूछे। उन्होंने विपक्ष द्वारा ईवीएम के विरोध को जनता के जनादेश का अनादर बताते हुए कहा कि यह भारत की पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया और देश के महान लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लगाने का विफल प्रयास है। श्री शाह ने फेसबुक व ट्विटर के माध्यम से एक के बाद एक प्रश्न पूछते हुए विपक्ष को दुनिया भर में हिंदुस्तान और देश के लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने वाला बताया।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा फेसबुक व ट्विटर पर विपक्ष से कहा गया कि ईवीएम का विरोध देश की जनता के जनादेश का अनादर है। अपनी संभावित हार से बौखलाई विपक्ष की यह 22 पार्टियां देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवालिया निशान उठा कर विश्व में देश और अपने लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रही है। इन सभी दलों की मांगों का कोई तार्किक आधार नहीं है और वह सिर्फ निजी स्वार्थ से प्रेरित है। मैं इन सभी पार्टियों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

प्रश्न नंबर- एक में कहा कि ईवीएम की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाने वाली कांग्रेस, बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, आप, तेलगु देशम पार्टी, वाम दल, राजद इत्यादि अधिकांश विपक्षी पार्टियों ने कभी न कभी ईवीएम द्वारा हुए चुनावों में विजय प्राप्त की है। जब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 70 में से 67 सीटों पर विजय प्राप्त की और हाल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 4 राज्यों में सरकार बनाई तब तो हमने ईवीएम पर प्रश्न नहीं उठाये। तो क्या यह माना जाए कि जब विपक्ष की विजय हो तो उन्होंने चुनाव जीता और जब हार हो तो उन्हें ईवीएम ने हरा दिया। यदि उन्हें ईवीएम पर विश्वास नहीं है तो इन दलों ने चुनाव जीतने पर सत्ता के सूत्र को क्यों संभाला?

प्रश्न नंबर- दो में कहा गया कि देश की सर्वोच्च अदालत ने तीन से ज्यादा पिल का संज्ञान लेने के बाद चुनावी प्रक्रिया को अंतिम स्वरूप दिया है। जिसमे की हर विधानसभा क्षेत्र में पांच वीवीपेट को गिनने का आदेश दिया है। तो क्या आप लोग सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे है?

प्रश्- नंबर- तीन में लिखा है कि मतगणना के सिर्फ दो दिन पूर्व 22 विपक्षी दलों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में परिवर्तन की मांग पुर्णतः असंवैधानिक है, क्योंकि इस तरह का कोई भी निर्णय सभी दलों की सर्वसम्मति के बिना संभव नहीं है।

प्रश्न- नंबर- चार में लिखा है कि विपक्ष ने ईवीएम के विषय पर हंगामा छः चरणों का मतदान समाप्त होने के बाद ही शुरू किया है। यह हंगामा विशेषकर एक्जिट पोल के परिणाम आने के बाद और तीव्र हो गया। मैं विपक्ष को बताना चाहता हूं कि एक्जिट पोल ईवीएम के आधार पर नहीं बल्कि, मतदान के पश्चात मतदाता से प्रश्न पूछ कर किया जाता है। अतः एक्जिट पोल के आधार पर आप ईवीएम की विश्वसनीयता पर कैसे प्रश्न उठा सकते है?

प्रश्न- पांच में लिखा है कि कुछ समय पूर्व ईवीएम में गड़बड़ी के विषय पर प्रोएक्टिव कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने सभी को सार्वजनिक रूप से चुनौती देकर इसके प्रदर्शन का आमंत्रण दिया था। परन्तु उस चुनौती को किसी भी विपक्षी दल ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम को वीवीपेट से जोड़ कर चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी किया। वीवीपेट प्रक्रिया के आने के बाद मतदाता मत देने के बाद देख सकता है कि उसका मत किस पार्टी को रजिस्टर हुआ। प्रक्रिया के इतने पारदर्शी होने के बाद इस पर प्रश्न उठाना कितना उचित है?

प्रश्न- नंबर- छः कुछ विपक्षी दल चुनाव के परिणाम अनुकूल न आने पर हथियार उठाने और खून की नदियाँ बहाने जैसे आपत्तिजनक बयान दे रहे है। मैं कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को बताना चाहता हूं कि लोकतंत्र में ऐसी हिंसात्मक सोच और भाषा का कोई स्थान नहीं है। विपक्ष बताये कि ऐसे हिंसात्मक और अलोकतांत्रिक बयान के द्वारा वह किसे चुनौती दे रहा है?

सभी को पता है कि पश्चिम बंगाल को छोड़ कर सारे देश में मतदान पूरी तरह शांति पूर्वक संपन्न हुआ है। भारत के लोकतंत्र का इतिहास है कि 1977 से 2014 के सभी आम चुनावों में भारी परिवर्तन शांति पूर्वक हुए, जिससे देश के लोकतंत्र पर सारे विश्व की आस्था मजबूत हुई और देश का गौरव भी बढ़ा। अपने निहित स्वार्थ और पराजय को न मानने की मानसिकता के कारण विपक्ष चुनाव आयोग और देश के लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रहा है। मेरा मानना है को इस चुनाव का जो भी परिणाम आये उसे सभी को स्वीकार्य करना चाहिए, क्योंकि यह देश के 90 करोड़ मतदाताओं का जनादेश होगा। मैं देश की जनता से भी अपील करना चाहता हूं कि ईवीएम पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे प्रश्न सिर्फ भ्रान्ति फैलाने का प्रयास है, जिससे प्रभावित हुए बिना हम सबको हमारे प्रजातांत्रिक संस्थानों को और मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।

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