स्मगलर के अचानक भाजपा नेता बनने से लोग स्तब्ध

स्मगलर के अचानक भाजपा नेता बनने से लोग स्तब्ध
स्मगलर के अचानक भाजपा नेता बनने से लोग स्तब्ध
स्मगलर के अचानक भाजपा नेता बनने से लोग स्तब्ध

पार्टी विद डिफरेंस का ढिंढोरा पीटने वाली भारतीय जनता पार्टी में भी माफिया, स्मगलर, डकैत और धोखाधड़ी करने वाले ससम्मान स्थान पाने लगे हैं। विधान सभा चुनाव लड़ने वालों की पंक्ति में दो नंबर का धंधा करने वाले आम तौर पर दिखने लगे हैं, जिससे भाजपा की छवि आम जनता की नजर में खराब होती जा रही है।

फिलहाल बात बदायूं जिले की करते हैं, यहाँ पिछले दिनों धनबलि और बाहुबलि के रूप में कुख्यात डी.पी. यादव के भतीजे जितेन्द्र यादव को न सिर्फ पार्टी में ले लिया, बल्कि सदस्यता के साथ ही विधान परिषद सदस्य का टिकट भी दे दिया। अब वे और उनके कई रिश्तेदार तीन-चार विधान सभा क्षेत्रों से टिकट मांगते नजर आ रहे हैं।

इसी तरह एक और नव धनाढ्य आज कल चर्चाओं के केंद्र में है। बताते हैं कि बदायूं जिले के कस्बा रुदायन के रहने वाले इस शख्स की एक-डेढ़ वर्ष पूर्व बैंक ने कृषि ऋण जमा न कर पाने पर आरसी जारी कर दी थी। आर्थिक हालात इतने दयनीय थे कि रिश्तेदारी में रह कर कस्बा चंदौसी स्थित एक कोल्ड स्टोर पर नौकरी करता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इस शख्स की संपत्ति ऐसे बढ़ी है, जैसे इसके हाथ पारस पत्थर लग गया हो।

कोल्ड स्टोर पर स्वयं को जितना वेतन नहीं मिलता था, उससे ज्यादा वेतन आज कल यह शख्स अपने सुरक्षा गार्ड को दे रहा है। स्वयं फॉर्च्यूनर गाड़ी से चलता है, साथ ही पीछे स्कॉट की तरह एक बुलेरो गाड़ी भी चलती है, यह रुतवा देख कर क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं और आम तौर पर एक-दूसरे से सवाल करते देखे जा सकते हैं कि यह सब कब और कैसे आ गया?

सूत्रों का कहना है कि किसी तरह हरियाणा और पंजाब के कुछ स्मगलर्स इसके संपर्क में आ गये, उनके साथ मिल कर धंधा करने लगा और देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगा। सूत्र का कहना है कि भाजपा के एक केन्द्रीय नेता से भी इसके स्मगलर्स के माध्यम से ही संबंध बन गये हैं, जिसने बदायूं जिले की बिल्सी विधान सभा क्षेत्र से टिकट दिलाने का आश्वासन दे दिया है। सूत्र का यह भी कहना है कि इस शख्स ने भाजपा के एक जिला स्तरीय नेता को गाड़ी भी गिफ्ट की है।

खैर, हाल-फिलहाल भाजपा में माफियाओं और स्मगलर्स की भीड़ बढ़ने लगी है, जिससे जनता के बीच तरह-तरह की बातें होने लगी हैं। पार्टी विद डिफरेंस मानने वाले लोग भी अब भाजपा को आम दलों श्रेणी में ही रखने लगे हैं।

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