माफियाओं से तालाब को बचा लीजिये मुख्यमंत्री जी

माफियाओं से तालाब को बचा लीजिये मुख्यमंत्री जी
दिनदहाड़े तालाब में मिटटी को समतल करती माफियाओं की जेसीबी।
दिनदहाड़े तालाब में मिटटी को समतल करती माफियाओं की जेसीबी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों, पिछड़ों, दलितों, महिलाओं और युवाओं के साथ समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए विभिन्न योजनायें चलाई जा रही हैं, जिससे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद गदगद नजर आते हैं, लेकिन सर्वे में खुलासा हुआ कि अगले चुनाव में समाजवादी पार्टी की हालत बेहद खराब रहेगी, इस सच को स्वीकार कर आत्ममंथन करने की जगह सपाई सर्वे को ही निराधार बताने लगे, जबकि मुख्यमंत्री को यह पता लगाना चाहिए था कि अच्छा काम करने के बावजूद जनता नाराज क्यूं है।

असलियत में नेताओं के माध्यम से प्रशासन पर भ्रष्टाचारी, दलाल और माफिया पूरी तरह हावी हो गये हैं, जो पात्रों तक योजनायें पहुंचने में बाधक हैं, वहीं खुलेआम मनमानी भी करते नजर आ रहे हैं। बात सिर्फ बदायूं जिले की ही करें, तो यहाँ भी हाल खराब है। एक ओर मुख्यमंत्री तालाबों को बचाने और नये तालाब बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं सपाइयों को हिस्सा देकर माफिया करोड़ों की कीमत के तालाबों पर दिनदहाड़े कब्जा करते नजर आ रहे हैं। प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद से सिर्फ बदायूं जिले में दर्जनों तालाब खत्म कर दिए गये हैं, जिससे पानी को लेकर यहाँ भी बुंदेलखंड जैसे भयावह हालात होने वाले हैं।

ग्रामीण क्षेत्र की तो बात ही छोड़िये, जिला मुख्यालय पर वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों के सिर के ऊपर भी तालाबों पर खुलेआम कब्जे किये जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार व्यक्तिगत तालाब भी खत्म नहीं किया जा सकता। बदायूं शहर में श्रीराम नगर नाम से कॉलोनी बनाई गई है, जिसके फेज- 3 को तालाब के ऊपर बनाया गया है, वहां आज तालाब का निशान तक नहीं बचा है, इसी तरह दातागंज तिराहे के पास सैकड़ों एकड़ में फैला विशाल प्राचीन तालाब है, जिसमें आधे शहर का पानी गिरता है, इस तालाब को माफिया खुलेआम कब्जा रहे हैं। डंपर तालाब में रात भर मिटटी डालते रहते हैं और दिन भर जेसीबी मिटटी को समतल करती रहती है, जिससे आधे शहर का पानी जाम होता जा रहा है। मोहल्ला नई सराय के लोगों के घरों में पानी उल्टा घुसने लगा है। परेशान लोग प्रशासनिक अफसरों से शिकायत भी करते रहे हैं, लेकिन सपा नेताओं के दबाव में माफियाओं के विरुद्ध कोई अफसर शिकायत तक सुनने को तैयार नहीं है।

उक्त घटना को एक उदाहरण के रूप में ले सकते हैं, ऐसे ही सैकड़ों घटनाक्रम हैं, जिनसे जनता सीधी प्रभावित हो रही है और त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन परेशान जनता की कोई सुनने वाला तक नहीं है। समाजवादी पेंशन, लोहिया आवास वगैरह के बदले कोई व्यक्ति स्वाभिमान और भविष्य नहीं बेच सकता। हर व्यक्ति को सबसे पहले भयमुक्त वातावरण और फिर सम्मान चाहिए, जो सपा सरकार देने में असफल रही है, इसीलिए लोकप्रियता का ग्राफ नीचे आ गया है, जिसे सुधारा भी जा सकता है, पर पहले सुधारने की सोच बनानी होगी, वरना खुशी-खुशी शक्तिशाली बनाने वाली त्रस्त जनता अधिकार विहीन भी कर सकती है।

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