आजम खां को फिर आया गुस्सा, प्रमुख सचिव से माँगा जवाब

आजम खां को फिर आया गुस्सा, प्रमुख सचिव से माँगा जवाब
संसदीय कार्य, मुस्लिम वक्फ, नगर विकास, जल संपूर्ति, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, शहरी समग्र विकास, अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज मंत्री आजम खां
संसदीय कार्य, मुस्लिम वक्फ, नगर विकास, जल संपूर्ति, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, शहरी समग्र विकास, अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज मंत्री आजम खां

उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री आजम खां को एक बार फिर गुस्सा आ गया है, इस बार उनके निशाने पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव को न सिर्फ पत्र लिखा है, बल्कि पत्र को सार्वजनिक भी कर दिया है।

संसदीय कार्य, मुस्लिम वक्फ, नगर विकास, जल संपूर्ति, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, शहरी समग्र विकास, अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज मंत्री आजम खां ने प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि आपको स्मरण कराना चाहूँगा और इस तथ्य से आप भली-भाँति अवगत भी हैं कि जनपद रामपुर में आई.आई.ए. (इण्डियन इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन) से जुड़े लोग अनैतिक एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त हैं, जिसको लेकर विगत दिनों रामपुर की जनता द्वारा विशेष रूप से युवा छात्रों द्वारा जुलूस निकाल कर आक्रोश प्रकट किया गया था।

रामपुर में औद्यौगिक विकास के लिये दी गयी बेशकीमती भूमि को तथा-कथित उद्योग बन्धुओं द्वारा निर्ममता से प्लाटिंग कर के बेच डाला गया और आश्चर्यजनक रूप से शासन-प्रशासन को न तो इसकी भनक लगी और न ही बाद में कोई गंभीर संज्ञान लेने की आवश्यकता समझी गयी।

आपको याद हो इस सम्बन्ध मेरे द्वारा आपके मौजूदगी में अन्य अधिकारियों के साथ हुयी बैठक में सभी बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा हुयी थी, जिसके बाद मुझे आशा थी कि मेरे गृह जनपद में सफेद कॉलर के नामनिहाद उद्योगपतियों द्वारा किये जा रहे अनैतिक कार्यों, विशेष रूप से इण्डस्ट्रियल एरिया की भूमि को अवैधानिक ढंग से प्लाटिंग कर के बेचने के मामले को गंभीरता से लिया जायेगा, लेकिन अफसोस है कि एक पखवाड़े़ से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बावजूद कोई सार्थक कार्यवाही तो दूर शासन द्वारा इस प्रकरण को कुरेदने तक की कोशिश नहीं की गयी, जबकि यह बात तथ्य के रूप में प्रमाणित हो चुकी है कि औद्योगिक क्षेत्र के भूखण्डों के आवंटन में अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अल्पसंख्यक वर्ग के कोटे के आरक्षण नियमों का अनुपालन भी नहीं किया गया।

अधिकारियों द्वारा शासनादेशों के नियमों को महज इसलिये ताक पर रख दिया गया, क्योंकि महंगी गाड़ी और ऐश-ओ-आराम की जिन्दगी गुज़ारने वाले उद्योगबन्धुओं के हर स्तर के अधिकारी के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध हैं, जो इतने मज़बूत हैं कि अधिकारियों को नियम तोड़ने और शासनादेशों  की धज्जियाँ उड़ाने से भी नहीं रोका जा सकता।

इसके अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है कि सभी बिन्दुओं के प्रकाश में आ जाने तथा स्वयं मेरे द्वारा संज्ञान लेने व आपको पत्र लिखकर अवगत कराने के बावजूद रामपुर के औद्योगिक क्षेत्र की एक भी अवैध इमारत को ध्वस्त नहीं कराया जा सका। यदि इसका कारण प्रक्रियात्मक विलंब है, तो यह विलंब किसको लाभ पहुंचाने के लिये है? और यदि प्रक्रिया में कोई विलंब नहीं है, तो मैं यह जानना चाहूँगा कि वह कौन सा गुप्त कारण है, जो जनपद से लेकर शासन तक के अधिकारियों को किंकर्तव्यविमूढ़ बने रहने पर मजबूर कर रहा है?

उन्होंने अंत में यह भी लिखा है आशा करता हूँ आप रामपुर की गरीब जनता के साथ न्याय करने में भले ही सक्षम न रहे हों, किन्तु मेरे उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर ज़रूर दे सकेंगे।

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