सपा में अनुशासन भंग होने से लोगों को याद आ रहे हैं बनवारी सिंह यादव

सपा में अनुशासन भंग होने से लोगों को याद आ रहे हैं बनवारी सिंह यादव

बदायूं जिले में बनवारी सिंह यादव की अनुपस्थिति अब सबको खलने लगी है। बनवारी सिंह यादव के न होने का ही दुष्परिणाम है कि समाजवादी पार्टी का अनुशासन तार-तार हो गया है। नगर निकाय चुनाव में घोषणा के बिना ही तमाम स्थानों पर लोगों ने स्वयं को प्रत्याशी घोषित कर लिया है, जिससे आम जनता के बीच समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के कमजोर होने का संदेश जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि नगर निकाय चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने समस्त निकायों से चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन मांगे थे, दावेदारों के इंटरव्यू लिए गये, उनके दावों पर मंथन किया गया। जिला स्तरीय टीम ने गहन समीक्षा के बाद सपा को जिताने वाले जनप्रिय प्रत्याशियों की सूची तैयार की, जिसे नगर निकाय चुनाव के पर्यवेक्षक सांसद धर्मेन्द्र यादव की सहमति के बाद लखनऊ भेजा जाना था।

समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची प्रदेश मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद सावर्जनिक होनी थी, लेकिन तमाम निकायों में लोगों ने सपा प्रत्याशी के रूप में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगा कर स्वयं के प्रत्याशी होने की घोषणा कर दी, इससे न सिर्फ सपा कार्यकर्ता, बल्कि आम जनता भी चौंक गई। सपा कार्यकर्ता अनुशासन भंग होने की बात करने लगे। लोग दिवंगत बनवारी सिंह यादव को याद करने लगे कि उनके रहते ऐसा दुस्साहस कोई नहीं कर सकता था, इस घटना से सपा के नेतृत्व के कमजोर होने का संदेश गया है।

सदर क्षेत्र के निवर्तमान विधायक व पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा ने कहा कि अनुशासन भंग हुआ है, नेतृत्व के सम्मान को कम करने वाली घटना है, इसे नेतृत्व को गंभीरता से लेना चाहिए। जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने कहा कि जिला स्तरीय कमेटी ने अपनी समीक्षा के बाद सूची पर्यवेक्षक को सूची सौंप दी है, जहाँ से संकेत मिलने के बाद लोगों ने प्रचार शुरू कर दिया होगा। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षक यहाँ से सांसद भी हैं, वे कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हुए हैं, टिकट कार्यकर्ताओं की मांग, नगर कमेटी, विधान सभा क्षेत्र की कमेटी और संबंधित प्रत्याशी की रिपोर्ट के आधार पर दिया जाता है। पर्यवेक्षक के पास सभी की रिपोर्ट है, वे उस आधार पर टिकट देंगे।

खैर, जो भी हो, इस घटना से समाजवादी पार्टी को नुकसान हुआ है। प्रत्याशी पहले से तय थे, तो आवेदन, इंटरव्यू, समीक्षा वगैरह करने की आवश्यकता ही क्या थी। कार्यकर्ताओं और जनता को संदेश दे दिया जाता कि किसी से कोई आवेदन और रिपोर्ट नहीं ली जायेगी, किसी भी दिन प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जायेगी, ऐसा करने से समाजवादी पार्टी का मान बचा रहता।

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