ब्योर कासिमाबाद के पीड़ितों को जांच का झुन-झुना थमा कर भूल गया प्रशासन

ब्योर कासिमाबाद के पीड़ितों को जांच का झुन-झुना थमा कर भूल गया प्रशासन

बदायूं जिले में थाना इस्लामनगर क्षेत्र के गांव ब्योर कासिमाबाद में प्रभात फेरी निकालने को लेकर 16 जनवरी को एसडीएम राशि कृष्णा की उपस्थिति में पुलिस ने लाठियों से पिटाई की थी। महिला-पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग दौड़ा-दौड़ा कर पीटे गये थे, इस घटना पर बजरंग दल ने जोरदार प्रदर्शन किया था, इसके बावजूद पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया था।

घटना की घनघोर निंदा होने लगी और तनाव बढ़ने लगा तो, एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने थाना प्रभारी नरेश कुमार, दरोगा और सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया था, जिससे पीड़ितों को कुछ राहत तो मिली लेकिन, पीड़ित संतुष्ट नहीं हुये, इस सबके बीच घटना आरएसएस के संज्ञान में पहुंच गई तो, आरएसएस ने संपूर्ण घटनाक्रम से मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा मुख्यालय को अवगत करा दिया, जिसके बाद हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री कार्यालय से कॉल आने पर पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो गया एवं भाजपा का प्रतिनिधि मंडल भी घटना स्थल पर गया।

भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पूर्व राज्यमंत्री एवं विधायक महेश चंद्र गुप्ता, विधायक राजीव कुमार सिंह “बब्बू भैया”, विधायक हरीश शाक्य, पूर्व विधायक कुशाग्र सागर, डीसीबी चेयरमैन रविन्द्र पाल सिंह और जिला महामंत्री पंडित शारदाकांत “सीकू भैया” ने ब्योर कासिमाबाद जाकर पीड़ितों से वार्ता की थी और अगले दिन पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में डीएम अवनीश राय एवं एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह से पीड़ितों की वार्ता कराई थी।

भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य और प्रतिनिधि मंडल के सामने पीड़ितों की गुहार सुनने के बाद एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बिल्सी के सीओ संजीव कुमार को तत्काल हटा दिया था, जिससे पीड़ितों को राहत मिली लेकिन, डीएम अवनीश राय ने एडीएम (प्रशासन) और एएसपी (सिटी) को जांच सौंप दी थी, जो अभी तक चल रही है। बिसौली तहसील की भ्रष्ट व्यवस्था के दोषी पीड़ितों और घायलों से बयान बदलने की रणनीति बना रहे हैं। गांव ब्योर कासिमाबाद के तमाम लोग धनाढ्यों और व्यापरियों के यहां नौकरी करते हैं, जो घटना के समय थे भी नहीं, उनसे शपथ पत्र देने को कहा गया। आरोपित लगातार अपने बचाव में जुटे हुये हैं लेकिन, जांच अधिकारी अभी तक जांच में ही उलझे हुये हैं।

अब सूत्रों का कहना है कि एडीएम (प्रशासन) लंबी छुट्टी पर चले गये हैं, जिससे माना जा रहा है कि जांच अभी एक सप्ताह तक पूरी नहीं होगी। ब्योर कासिमाबाद के घायल और पीड़ित न्याय की आशा में हर दिन यह सोच कर उठते हैं कि आज डीएम साहब का कोई संतोषजनक आदेश आयेगा लेकिन, शाम को सूरज ढलने केसाथ आशा भी अंधेरे में डूब जाती है। अब लोग सवाल करने लगे हैं कि बिना अंतिम तिथि के जाँच का झुन-झुना पीड़ितों और घायलों को पकड़ाया ही क्यों था?

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