डीएम की प्रेरणा से जुड़े व्यापारियों ने खड़ा कर दिया सांस्कृतिक आंदोलन

डीएम की प्रेरणा से जुड़े व्यापारियों ने खड़ा कर दिया सांस्कृतिक आंदोलन

बदायूं जिले के कछला में गंगा महाआरती की योजना बनाने में निःसंदेह जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह का ही भागीरथी प्रयास है। जिलाधिकारी ने प्रशासन और आम जनता की भागीदारी से एक विचार को सांस्कृतिक आंदोलन बना दिया लेकिन, हर भवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान नींव के पत्थरों का ही होता है, जिन्हें अपेक्षाकृत सम्मान नहीं मिलता। जिलाधिकारी की प्रेरणा से जुड़ने वाले भामाशाहों के आर्थिक योगदान के बिना महाआरती का आयोजन सफल हो पाना संभव नहीं हो पाता।

जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह की प्रेरणा से सर्व प्रथम मैंथा ऑयल की दुनिया के चर्चित व्यापारी प्रकाश कैमिकल्स के स्वामी प्रतीश गुप्ता, एचवी ऐरिमैटिक के स्वामी हरिभगवान अग्रवाल ने न सिर्फ आर्थिक सहयोग किया बल्कि, व्यापार को किनारे कर जिलाधिकारी के साथ कंधे से कंधा मिला कर कछला स्थित घाट पर जाकर निरंतर कार्य कराया। भामाशाहों के समूह में उझानी निवासी भारत मिंट के स्वामी मनोज गोयल, ज्वैलर्स प्रदीप गोयल और ब्लूमिंगडेल स्कूल के निदेशक ज्योति मेंदीरत्ता भी हीरे की तरह जुड़ गये। आर्थिक समस्या का समाधान हुआ तो, घाट पर क्रांतिकारी परिवर्तन नजर आने लगा, जिससे जिले भर के लोग उत्साहित हो उठे।

आयोजन में पत्रकार शैलेन्द्र शुक्ला, पत्रकार सौरभ शर्मा, समाजसेवी राजन मेंदीरत्ता, कृष्ण कुमार, मनीष अग्रवाल, नीरज शर्मा, मुकेश तोमर और अनिल यादव का भी योगदान महत्वपूर्ण रहा है, इन लोगों ने शारीरिक और मानसिक तौर पर विशेष योगदान दिया है, इस टीम के अथक परिश्रम के बाद गंगा महाआरती का दृश्य सामने आया तो, न सिर्फ जिले के लोग बल्कि, आस-पास के जिलों के लोग भी स्तब्ध रह गये। महाआरती में शामिल होने के लिए जनसैलाब उमड़ने लगा, जिसकी धमक लखनऊ तक पहुंच गई है।

शासन स्तर पर गंगा महाआरती की चर्चा है। जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह की प्रेरणा से आयोजन सांस्कृतिक आंदोलन बन गया है, उनके आग्रह पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने महाआरती में शामिल होने की सहमति दे दी है। मुख्यमंत्री का आना तय है लेकिन, अभी तक दिन निश्चित नहीं हुआ है। जिलाधिकारी के साथ महाआरती की टीम मुख्यमंत्री के आने की तैयारी में जुटी हुई है।

उधर गंगा महाआरती में यजमान बनने की प्रतियोगिता सी चल पड़ी है। शहर और कस्बों से ही नहीं, गाँवों से भी लोग यजमान बनने को आतुर नजर आ रहे हैं। ऐतिहासिक आयोजन में जन-जन की भागीदारी हो गई है, जिससे महाआरती जिले की विशिष्ट पहचान बन कर राष्ट्रीय क्षितिज पर शीघ्र ही उभरेगी।

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