बदायूं क्लब पर एकाधिकारी, भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर दिया ज्ञापन

बदायूं क्लब पर एकाधिकारी, भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर दिया ज्ञापन

बदायूं क्लब में व्याप्त भ्रष्टाचार और अक्षत की मनमानी को लेकर आवाज बुलंद होने लगी है। जिलाधिकारी के नाम आज अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को ज्ञापन दिया गया। संत रविदास सेवा न्यास के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि बदायूं क्लब के स्वर्णिम इतिहास पर एकाधिकार कर लिया गया है, जिसके लिए संगठन सड़क से लेकर संसद तक की लड़ाई लड़ने को तैयार है एवं आवश्यकता पड़ी, तो संगठन न्यायालय की शरण में भी जायेगा।

ज्ञापन में कहा गया है कि बदायूं क्लब के सचिव अक्षत दास कॉलेज में बाबू के पद पर कार्यरत है, फिर भी ये क्लब के सचिव के पद पर काबिज है। सामाजिक धरोहर बदायूं क्लब पर पूर्ण रूप से सचिव का कब्जा है, सचिव के निर्णय के बिना कोई कार्य प्रांगण व भवन में नहीं हो सकता है। बदायूं क्लब में अश्लील जादू कम्पनी करवाई गई, पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी की अनुमति के बिना ही शादी, पार्टी एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित करा कर लाखों रुपयों का घोटाला खुलेआम किया जा रहा है।

बदायूं क्लब में धर्म के आधार पर भेद-भाव किया जाता है, गरीब व पिछड़े वर्ग का व्यक्ति चाहे वो समाज सेवी ही क्यों ना हो, इसमें सदस्यता नहीं ले सकता है, इसका सदस्यता शुल्क मानक के विरुद्ध 10 हज़ार से अधिक लिया जाता है, जिससे पूंजीपतियों को स्थान मिला हुआ है। क्लब के अध्यक्ष जिलाधिकारी हैं, जिससे क्लब की शिकायत करने पर अधीनस्थ जांच और कार्रवाई नहीं करते।

क्लब से जन सूचना अधिकार अधिनियम- 2005 के अंतर्गत मांगी गई सूचना पर सचिव की ओर से लिखित जानकारी दी गई कि क्लब एक निजी संस्था है, इसलिये सूचना नहीं दी जा सकती। पूर्व में सैकड़ों शिकायतें कई लोगो द्वारा की गयीं, लेकिन जिलाधिकारी के अध्यक्ष होने की आड़ में हर मुद्दे को बहुत ही चतुरता और चापलूसी से मिथ्या करार दिला दिया जाता है। हर जांच में आज तक कभी कोई कार्यवाही करने ही नहीं दी गयी है, जिससे न चाहते हुए भी शिकायतकर्ता मौन हो जाते हैं। सचिव अक्षत के लिये बदायूं क्लब दुधारू गाय है, जिसके लिये सचिव कुछ भी कर सकते हैं, कुछ भी कह सकते हैं, जो एक तानाशाही का प्रमाण है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि जनपद की धरोहर बदायूं क्लब की रक्षा की जाये, घोटाले और एकाधिकार को दृष्टिगत रखते हुए उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित की जाये, जो शिकायतकर्ता की उपस्थिति में जाँच करे, साथ ही तत्काल कमेटी भंग कर प्रशासक नियुक्त किया जाये एवं नये सदस्य बना कर पारदर्शी वातावरण में चुनाव कराया जाये।

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